भैंस खरीदने से पहले क्या जाँच करें: पूरी खरीद गाइड

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Pashu Mandi Team
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डेयरी व्यवसाय की सफलता या घर में दूध की जरूरत पूरी करने के लिए एक अच्छी और स्वस्थ भैंस का चुनाव करना सबसे जरूरी कदम है। कई बार अनुभव की कमी या जल्दबाजी के कारण पशुपालक भाई ऐसी भैंस खरीद लेते हैं जो उम्मीद के मुताबिक दूध नहीं देती या बार-बार बीमार पड़ने लगती है। इससे आर्थिक नुकसान भी होता है और समय भी बर्बाद होता है।

यदि आप मंडी, गाँव या किसी ऑनलाइन माध्यम से भैंस खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ बुनियादी बातों की जाँच करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि भैंस खरीदते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आप एक सही और मुनाफे का सौदा कर सकें।

1. भैंस की शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य की पहचान

एक तंदुरुस्त और ज्यादा दूध देने वाली भैंस की बनावट में कुछ खास लक्षण होते हैं, जिन्हें देखकर आप उसकी सेहत का अंदाजा लगा सकते हैं:

  • शरीर का आकार: दुधारू भैंस का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा यानी 'त्रिकोणीय' (Wedge shape) होना चाहिए। उसकी पीठ सीधी और पसलियां खुली-खुली होनी चाहिए।
  • आँखें और कान: भैंस की आँखें चमकदार, साफ और सजग होनी चाहिए। कान सक्रिय हों और मक्खियों या आवाज पर तेजी से हिलें। सुस्त खड़ी भैंस बीमार हो सकती है।
  • थूथन (Muzzle): स्वस्थ भैंस का थूथन हमेशा हल्का गीला रहता है और उस पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें दिखाई देती हैं। सूखा थूथन बुखार या किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • त्वचा और बाल: त्वचा मुलायम, चमकदार और ढीली होनी चाहिए। हड्डियों पर ज्यादा चर्बी जमी न हो।
  • जुगाली और चाल: देखें कि भैंस ठीक से जुगाली कर रही है या नहीं। उसे थोड़ा चलाकर देखें कि उसके खुर मजबूत हैं और वह लंगड़ा तो नहीं रही है।

2. लेवटी (अडर) और थनों की सही जाँच

दूध उत्पादन सीधे तौर पर भैंस के अडर (लेवटी) और थनों के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इस हिस्से की जाँच में कभी जल्दबाजी न करें:

  • लेवटी की बनावट: लेवटी पेट से अच्छी तरह जुड़ी होनी चाहिए और लटकी हुई न हो। दुहने के बाद लेवटी सिकुड़ जानी चाहिए, जिससे पता चलता है कि उसमें दूध की ग्रंथियां अच्छी हैं, न कि सिर्फ चर्बी।
  • थनों का आकार और दूरी: चारों थनों का आकार एक समान होना चाहिए और उनके बीच बराबर दूरी होनी चाहिए। बहुत छोटे या बहुत मोटे थन से दूध निकालने में परेशानी होती है।
  • गांठ या थनैला (Mastitis) की जाँच: थनों और लेवटी को हाथ लगाकर देखें। अगर कहीं कोई सख्त गांठ, सूजन या दर्द महसूस हो, तो वह थनैला रोग का लक्षण हो सकता है। ऐसी भैंस खरीदने से बचें।
  • दूध की धार: चारों थनों से दूध निकालकर देखें। धार सीधी, बिना रुकावट और बराबर आनी चाहिए। दूध में खून, छिछड़े या पीलापन नहीं होना चाहिए।

3. दूध की सही जाँच (चोआई) कैसे करें?

व्यापारी या विक्रेता के केवल मौखिक दावों पर कभी भरोसा न करें। दूध की असल क्षमता जानने के लिए यह तरीका अपनाएं:

  • भैंस का दूध अपने सामने कम से कम 2 से 3 समय (milking sessions) खुद निकलवाकर या खड़े रहकर नपवाएं।
  • सुबह और शाम दोनों समय के दूध का औसत निकालें, क्योंकि अक्सर सुबह और शाम के दूध की मात्रा में थोड़ा फर्क होता है।
  • यह भी जांचें कि दूध निकालते समय भैंस शांत रहती है या लात मारती है। शांत स्वभाव की भैंस को संभालना और दुहना आसान होता है।

4. दांत देखकर भैंस की उम्र की पहचान

भैंस की उम्र जानने का सबसे सटीक देशी तरीका उसके नीचे के जबड़े के दांत (Incisors) देखना है। उम्र के साथ दूध के दांत गिरते हैं और पक्के दांत आते हैं:

दांतों की स्थितिभैंस की अनुमानित उम्र
सभी 8 दूध के दांत मौजूद होंलगभग 2 से 2.5 वर्ष से कम
बीच के 2 पक्के दांत (दो दांत)लगभग 2.5 से 3 वर्ष
4 पक्के दांत निकल आना (चौगा)लगभग 3.5 से 4 वर्ष
6 पक्के दांत निकल आना (छीगा)लगभग 4.5 से 5 वर्ष
सभी 8 पक्के दांत पूरे होना (भरा मुँह)लगभग 5 से 6 वर्ष
दांत घिसने लगना और बीच में खाली जगह बनना8 वर्ष या उससे अधिक

नोट: दांतों का विकास भैंस के खान-पान, नस्ल और क्षेत्र के अनुसार थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।

डेयरी के लिहाज से दूसरे या तीसरे ब्यांत की भैंस खरीदना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इस दौरान भैंस अपने चरम उत्पादन पर होती है।

5. वेटरनरी डॉक्टर से जाँच क्यों जरूरी है?

बड़ा निवेश करने से पहले किसी योग्य पशु चिकित्सक (Veterinarian) से भैंस की जाँच करवाना हमेशा समझदारी भरा कदम होता है। डॉक्टर निम्नलिखित बातों की पुष्टि कर सकते हैं:

  • गर्भावस्था (Pregnancy status): यदि भैंस को गाभिन बताकर बेचा जा रहा है, तो डॉक्टर गर्भाशय की जाँच करके सही स्थिति बता सकते हैं।
  • प्रजनन तंत्र का स्वास्थ्य: बच्चेदानी में कोई इन्फेक्शन या खराबी तो नहीं है, जिससे आगे चलकर भैंस खाली (repeat breeder) न रहे।
  • टीकाकरण और सामान्य स्वास्थ्य: क्या भैंस को गलघोंटू (HS), खुरपका-मुँहपका (FMD) जैसे जरूरी टीके लगे हैं।

6. दलालों और धोखाधड़ी से बचने के उपाय

पशु मेलों या अनजान जगहों पर कुछ विक्रेता अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। इनसे सावधान रहें:

  • दूध रोककर रखना: कई बार ज्यादा दूध दिखाने के लिए भैंस का दूध 18-24 घंटे तक नहीं निकाला जाता, जिससे अडर बहुत भारी दिखता है। इसलिए लगातार दो-तीन समय की चोआई जरूरी है।
  • दवाइयों का अनुचित उपयोग: कुछ लोग भैंस को शांत दिखाने या अचानक दूध उतारने के लिए गलत इंजेक्शन देते हैं। भैंस की सामान्य फुर्ती और स्वाभाविक व्यवहार पर नजर रखें।
  • कागजात और पहचान: यदि भैंस किसी पंजीकृत नस्ल (जैसे मुर्रा, नीली रावी, जाफराबादी) की बताई जा रही है, तो उसकी नस्लीय विशेषताओं की पुष्टि करें।

7. सुरक्षित खरीद के अंतिम टिप्स

भैंस पसंद आने के बाद लेन-देन करते समय पक्की रसीद या लिखित दस्तावेज जरूर तैयार करें। यदि संभव हो तो ऑनलाइन या बैंक ट्रांसफर के जरिए भुगतान करें ताकि रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। खरीद के बाद भैंस को नए माहौल में लाने पर पहले कुछ दिन तनावमुक्त रखें और आहार में अचानक बड़ा बदलाव न करें।

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