दुधारू गाय और भैंस में थनैला रोग से बचाव, लक्षण और थन की देखभाल गाइड

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Pashu Mandi Team
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दुधारू पशुओं में थनैला रोग (Mastitis): डेयरी फार्मिंग की सबसे बड़ी चुनौती

डेयरी व्यवसाय में थनैला रोग (Mastitis) पशुपालकों के लिए सबसे अधिक आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली बीमारियों में से एक है। यह रोग गाय और भैंस दोनों के थनों तथा अयन (Udder) में विभिन्न प्रकार के हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria) के प्रवेश से होता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और रोकथाम न की जाए, तो पशु का थन हमेशा के लिए खराब (मार) हो सकता है और दूध उत्पादन पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

थनैला रोग के प्रमुख लक्षण

थनैला रोग मुख्य रूप से दो रूपों में सामने आता है:

1. प्रत्यक्ष थनैला (Clinical Mastitis)

  • थन में सूजन व दर्द: प्रभावित थन सामान्य से बड़ा, गर्म और कठोर हो जाता है तथा पशु उसे छूने नहीं देता।
  • दूध में बदलाव: दूध पतला, पानी जैसा, पीलापन लिए हुए या मटमैला हो जाता है। दूध में दही जैसे सफेद थक्के, छिछड़े या खून के अंश आ सकते हैं।
  • पशु का व्यवहार: पशु को हल्का बुखार आ सकता है, वह चारा खाना कम कर देता है और सुस्त हो जाता है।

2. अप्रत्यक्ष थनैला (Sub-Clinical Mastitis)

इस स्थिति में बाहर से थन में कोई सूजन नहीं दिखती, लेकिन अंदरूनी संक्रमण के कारण दूध उत्पादन में 10% से 30% तक की कमी आ जाती है। इसे कैलिफोर्निया मैस्टाइटिस टेस्ट (CMT) या स्ट्रिप कप टेस्ट द्वारा ही पकड़ा जा सकता है।

थनैला रोग फैलने के मुख्य कारण

  1. अस्वच्छ आवास: पशु के बैठने की जगह पर गोबर, कीचड़, नमी और पेशाब का जमावड़ा होना।
  2. गलत मिल्किंग विधि: अंगूठा मोड़कर (Knuckling method) दूध दुहना, जिससे थन के अंदरूनी नाजुक ऊतक कट जाते हैं।
  3. दूध निकालने के तुरंत बाद बैठना: दूध दुहने के 30 से 45 मिनट तक थन का छिद्र खुला रहता है। यदि पशु तुरंत गंदे फर्श पर बैठ जाए, तो जमीन के बैक्टीरिया सीधे थन में प्रवेश कर जाते हैं।
  4. अधूरा दोहन: थन में थोड़ा सा भी दूध अधूरा छोड़ देने पर वह बैक्टीरिया के पनपने का मुख्य केंद्र बन जाता है।

थनैला रोग से बचाव के 5 वैज्ञानिक नियम

थनैला रोग का इलाज करने से बेहतर है इससे बचाव करना। दैनिक प्रबंधन में इन 5 नियमों का कड़ाई से पालन करें:

1. पूर्ण हस्त दोहन (Full Hand Milking) अपनाएं

दूध हमेशा पूरी हथेली और उंगलियों के दबाव से निकालें। कभी भी अंगूठा मोड़कर दूध न दुहें। दूध दुहने वाले व्यक्ति के हाथ साफ और नाखून कटे होने चाहिए।

2. टीट डिपिंग (Teat Dipping) का नियमित उपयोग

दूध दुहने के तुरंत बाद प्रत्येक थन को एक विशेष रोगाणुरोधी टीट डिप घोल (जैसे 0.5% से 1% पोविडोन आयोडीन घोल) में लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर तक डुबोएं। यह घोल थन के खुले छिद्र पर सुरक्षात्मक परत बना देता है।

3. दुहने के बाद तुरंत चारा डालें

दूध निकालने के तुरंत बाद पशु के आगे हरा चारा या दाना डाल दें, ताकि पशु कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे तक खड़ा रहे और चारा खाता रहे। इससे थन का छिद्र स्वाभाविक रूप से बंद हो जाता है।

4. पशुशाला की स्वच्छता और चूने का छिड़काव

शेड का फर्श हमेशा सूखा और साफ रखें। सप्ताह में 2-3 बार फर्श पर सूखा चूना (Lime powder) छिड़कें, जिससे नमी सोख ली जाती है और बैक्टीरिया का खात्मा होता है।

5. नियमित जांच (Strip Cup / CMT Test)

प्रत्येक दुग्ध दोहन के समय पहली दो-तीन धारों को एक काली स्ट्रिप कप प्लेट में निकालें। यदि उसमें कोई जाली, छिछड़ा या थक्का दिखे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

संक्रमण के लक्षण दिखने पर क्या करें?

यदि किसी गाय या भैंस में थनैला के शुरुआती लक्षण दिखाई दें:

  • तुरंत उस पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग करें और उसका दूध सबसे अंत में निकालें ताकि संक्रमण अन्य पशुओं में न फैले।
  • संक्रमित थन का दूध जमीन पर न गिराएं, बल्कि बर्तन में लेकर सुरक्षित स्थान पर नष्ट करें।
  • बिना देरी योग्य पशु चिकित्सक (Veterinarian) से संपर्क करें। कभी भी स्वयं मेडिकल स्टोर से लाकर अनावश्यक इंजेक्शन या एंटीबायोटिक न लगाएं।

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महत्वपूर्ण सूचना

इस लेख की जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर पशु चिकित्सा सलाह, कानूनी सलाह या वित्तीय सलाह नहीं है। पशु स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों के लिए हमेशा योग्य पशु चिकित्सक से परामर्श करें, कानूनी मामलों के लिए योग्य कानूनी पेशेवर से और निवेश निर्णयों के लिए वित्तीय सलाहकार से। पशुओं की कीमतें, बाजार की स्थितियाँ और प्रथाएँ क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती हैं — महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले स्थानीय स्रोतों से पुष्टि करें। यह सामग्री किसी सरकारी निकाय के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती और किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं देती। कोई त्रुटि मिली? हमें ईमेल करें: info@pashumandi.in

Tags:थनैला रोगmastitis careपशु देखभालदुग्ध उत्पादनथन की सफाईdairy care tipsगाय भैंस की देखभाल

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