गर्मियों में गाय और भैंस की देखभाल: हीट स्ट्रेस से बचाव, पानी और आहार प्रबंधन
गर्मियों में दुधारू पशुओं में हीट स्ट्रेस (लू) का प्रभाव
उत्तर और मध्य भारत में गर्मियों के महीनों (अप्रैल से जुलाई) में तापमान 40°C से 48°C तक पहुंच जाता है। अत्यधिक तापमान और उमस के कारण दुधारू पशुओं (विशेषकर संकर गायों और भैंसों) में हीट स्ट्रेस (Heat Stress) की गंभीर समस्या पैदा होती है।
हीट स्ट्रेस के कारण पशुओं का तापमान बढ़ जाता है, जिससे उनकी भूख कम हो जाती है, पाचन तंत्र प्रभावित होता है, दूध उत्पादन में 15% से 30% तक की भारी गिरावट आ सकती है और पशु का प्रजनन चक्र (हीट में आना) रुक सकता है। सही समय पर वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान भाई पशुओं को लू से बचा सकते हैं और दूध उत्पादन को स्थिर रख सकते हैं।
पशुओं में हीट स्ट्रेस और लू के प्रमुख लक्षण
यदि पशु गर्मी से पीड़ित है, तो उसमें निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं:
- हांफना और तेज सांस लेना: पशु प्रति मिनट सामान्य से बहुत तेज गति से सांस लेता है और गंभीर स्थिति में मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालता है।
- लार गिरना: मुंह से लगातार चिपचिपी लार टपकती है।
- भूख में कमी: पशु सूखा चारा और दाना खाना कम या बंद कर देता है, लेकिन बार-बार पानी की तलाश करता है।
- दूध में गिरावट: दूध की मात्रा और वसा (Fat) प्रतिशत में अचानक कमी आ जाती है।
- सुस्ती और बेचैनी: पशु गर्दन नीची करके खड़ा रहता है, छाया में छिपने की कोशिश करता है और गोबर पतला कर सकता है।
1. पशु आवास (शेड) का ठंडा और हवादार प्रबंधन
पशु को सीधी धूप और गर्म हवा से बचाना सबसे पहला कदम है:
- छत का इन्सुलेशन: यदि शेड की छत लोहे के एस्बेस्टस या टिन की चादर की है, तो उस पर पुआल, पराली, सूखी घास या जूट की बोरियां बिछाकर दिन में पानी का छिड़काव करें। छत के ऊपर सफेद चूने की पुताई करने से 4-5 डिग्री तापमान कम हो जाता है।
- हवा का प्रवाह: शेड में क्रॉस-वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) सुनिश्चित करें। शेड के अंदर सीलिंग फैन या एग्जॉस्ट फैन लगाएं।
- ग्रीन नेट और पर्दे: शेड की पश्चिम और दक्षिण दिशा में, जहां से गर्म लू आती है, एग्रो ग्रीन नेट या जूट के भीगे हुए पर्दे लटकाएं।
- छायादार वृक्ष: शेड के आसपास नीम, शीशम या पीपल के पेड़ लगाने से प्राकृतिक रूप से वातावरण ठंडा रहता है।
2. पानी और नहलाने की वैज्ञानिक व्यवस्था (विशेषकर भैंसों के लिए)
भैंसों का रंग काला होने के कारण वे सूर्य की गर्मी को जल्दी सोखती हैं और उनकी त्वचा में गाय की तुलना में एक-छठा हिस्सा ही पसीने की ग्रंथियां (Sweat Glands) होती हैं। इसलिए उन्हें अतिरिक्त ठंडक की आवश्यकता होती है:
- नहलाने का समय: भैंसों को दिन में 2 से 3 बार ठंडे व ताजे पानी से नहलाएं। सबसे अच्छा समय सुबह 10 बजे से पहले और दोपहर 2 से 4 बजे के बीच है। सीधी तेज धूप में नहलाने से बचें।
- फॉगर्स या स्प्रिंकलर: डेयरी फार्म में यदि संभव हो तो फॉगर्स (फव्वारे) लगाएं जो हर 15 मिनट में 2 मिनट के लिए पानी की फुहार छोड़ें।
- असीमित ताजा पानी: पशुओं के लिए 24 घंटे ताजा, ठंडा और साफ पानी पीने के लिए उपलब्ध होना चाहिए। गर्मियों में एक दुधारू गाय या भैंस को प्रतिदिन 100 से 150 लीटर तक पानी की आवश्यकता हो सकती है। पानी की टंकी छायादार जगह पर होनी चाहिए ताकि पानी गर्म न हो।
3. गर्मियों में संतुलित आहार और चारा प्रबंधन
गर्मी के मौसम में पाचन क्रिया के दौरान शरीर में अधिक ऊष्मा (Heat) पैदा होती है। इसलिए आहार में निम्नलिखित बदलाव करें:
- भोजन का समय बदलें: दिन के सबसे ठंडे समय—सुबह तड़के (5 से 7 बजे) और शाम को (7 से 9 बजे के बाद)—दाना और चारा खिलाएं। दोपहर के समय केवल हल्का हरा चारा ही दें।
- हरे चारे की मात्रा बढ़ाएं: मक्का, ज्वार, बाजरा, लोबिया या साइलेज जैसे रसीले चारे अधिक दें। हरा चारा शरीर में पानी की कमी पूरी करता है और पाचन को सुगम बनाता है।
- उच्च ऊर्जा आहार और बाईपास फैट: चूंकि पशु कम चारा खाता है, इसलिए दाने की गुणवत्ता और ऊर्जा घनत्व बढ़ाएं। संतुलित दाना मिश्रण में बाईपास फैट (50-100 ग्राम) मिलाने से बिना शरीर का तापमान बढ़ाए ऊर्जा मिलती है।
- खनिज लवण (Mineral Mixture) और नमक: पसीने और लार के साथ शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। इसलिए प्रतिदिन 50-60 ग्राम अच्छी कंपनी का मिनरल मिक्सचर और 30-40 ग्राम साधारण नमक चारे में अवश्य मिलाएं।
- मीठा सोडा (Sodium Bicarbonate): आहार में 30-50 ग्राम मीठा सोडा मिलाने से पेट की अम्लता (Acidosis) रुकती है और दूध का फैट बना रहता है।
4. लू या हीट स्ट्रोक लगने पर प्राथमिक उपचार
यदि पशु अचानक लू की चपेट में आ जाए और तेज बुखार (105°F से अधिक) के साथ कांपने लगे, तो तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:
- पशु को तुरंत ठंडी छाया में ले जाएं और पंखा चालू करें।
- सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर लगातार ठंडा पानी डालें या बर्फ की थैली रखें। पैरों और छाती पर गीली बोरियां लपेटें।
- पशु को थोड़ा-थोड़ा करके ओआरएस (ORS), गुड़ और नींबू मिला ठंडा पानी पिलाएं।
- बिना देरी किए तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक (Veterinarian) को बुलाएं ताकि जरूरत पड़ने पर इंट्रावीनस (IV) ड्रिप और जीवनरक्षक दवाएं दी जा सकें। खुद से कोई भी तेज दवा न दें।
महत्वपूर्ण सूचना
इस लेख की जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर पशु चिकित्सा सलाह, कानूनी सलाह या वित्तीय सलाह नहीं है। पशु स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों के लिए हमेशा योग्य पशु चिकित्सक से परामर्श करें, कानूनी मामलों के लिए योग्य कानूनी पेशेवर से और निवेश निर्णयों के लिए वित्तीय सलाहकार से। पशुओं की कीमतें, बाजार की स्थितियाँ और प्रथाएँ क्षेत्र के अनुसार बदलती रहती हैं — महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले स्थानीय स्रोतों से पुष्टि करें। यह सामग्री किसी सरकारी निकाय के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती और किसी विशेष परिणाम की गारंटी नहीं देती। कोई त्रुटि मिली? हमें ईमेल करें: info@pashumandi.in।
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